क भी कभी यह लग सकता है कि कुछ चैनल बहसों और टीवी कार्यक्रमों में भाषा की शुचिता खोते जा रहे हैं। देश के कई हिस्सों में भाषा की गिरावट और अपशिष्टता का स्तर बढ़ रहा है। यह केवल भाषा का ही नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों का भी पतन है। चैनलों पर अक्सर देखा जाता है कि संवाददाता और मेजबान अपनी भाषा में अशिष्टता और अपशिष्टता का प्रयोग करते हैं, जो दर्शकों के लिए अनुचित है। यह स्थिति देश के सांस्कृतिक और सामाजिक ताने-बाने को कमजोर कर रही है। कभी कभी यह लग सकता है कि कुछ चैनल बहसों और टीवी कार्यक्रमों में भाषा की शुचिता खोते जा रहे हैं। देश के कई हिस्सों में भाषा की गिरावट और अपशिष्टता का स्तर बढ़ रहा है। यह केवल भाषा का ही नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों का भी पतन है। चैनलों पर अक्सर देखा जाता है कि संवाददाता और मेजबान अपनी भाषा में अशिष्टता और अपशिष्टता का प्रयोग करते हैं, जो दर्शकों के लिए अनुचित है। यह स्थिति देश के सांस्कृतिक और सामाजिक ताने-बाने को कमजोर कर रही है। यह स्थिति देश के सांस्कृतिक और सामाजिक ताने-बाने को कमजोर कर रही है।
भाषा की शुचिता और नैतिकता का संरक्षण आवश्यक है। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति और सभ्यता का दर्पण भी है। जब भाषा में अशिष्टता और अपशिष्टता बढ़ती है, तो यह समाज में असम्मान और असंवेदनशीलता को जन्म देती है। इसलिए, चैनलों और मीडिया संस्थानों को चाहिए कि वे अपनी भाषा की शुचिता बनाए रखें और नैतिकता का पालन करें। भाषा की शुचिता और नैतिकता का संरक्षण आवश्यक है। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति और सभ्यता का दर्पण भी है। जब भाषा में अशिष्टता और अपशिष्टता बढ़ती है, तो यह समाज में असम्मान और असंवेदनशीलता को जन्म देती है। इसलिए, चैनलों और मीडिया संस्थानों को चाहिए कि वे अपनी भाषा की शुचिता बनाए रखें और नैतिकता का पालन करें।
जपा जैसे राजनीतिक दलों में भी नैतिकता और शुचिता के पाठ पढ़ाए जाने चाहिए। राजनीतिक संवाद और बहसों में शालीनता और सम्मान बनाए रखना आवश्यक है। इससे न केवल राजनीतिक संस्कृति सुधरेगी, बल्कि जनता का विश्वास भी बढ़ेगा। भाषा की शुचिता और नैतिकता का पालन करना हर नागरिक और संस्था की जिम्मेदारी है। अंततः, भाषा की शुचिता और नैतिकता का संरक्षण देश की प्रगति और सामाजिक सौहार्द के लिए अनिवार्य है। हमें अपने संवादों और व्यवहारों में शालीनता और सम्मान बनाए रखना चाहिए ताकि हमारा समाज और देश एक बेहतर और सभ्य स्थान बन सके। अंततः, भाषा की शुचिता और नैतिकता का संरक्षण देश की प्रगति और सामाजिक सौहार्द के लिए अनिवार्य है। हमें अपने संवादों और व्यवहारों में शालीनता और सम्मान बनाए रखना चाहिए ताकि हमारा समाज और देश एक बेहतर और सभ्य स्थान बन सके। अंततः, भाषा की शुचिता और नैतिकता का संरक्षण देश की प्रगति और सामाजिक सौहार्द के लिए अनिवार्य है। हमें अपने संवादों और व्यवहारों में शालीनता और सम्मान बनाए
भ्रष्टाचार और महंगाई के मुद्दे पर सरकार की चुप्पी सवालों को जन्म देती है। भ्रष्टाचार और महंगाई के मुद्दे पर सरकार की चुप्पी सवालों को जन्म देती है। भ्रष्टाचार और