बहुत लोगों की किस्मत बहुत अच्छी है, लोग मजे में है
यहां मदद करने वाली व्हाइट हेलमेट्स की टीम ने एक वीडियो शेयर करते हुए बताया कि मृत लोगों को एक साथ दफनाया जा रहा है। वहीं भारत ने ह्यऑपरेशन दोस्तह्न के तहत छठा विमान तुर्किये भेजा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। अमेरिकी कंपनी मैक्सार टेक्नोलॉजी ने कुछ तस्वीरें जारी की है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट इसकी जानकारी दी।
नई दिल्ली । (एजेंसी)
हुल गाँधी की कांग्रेस और उसके साथी तमिलनाडु के स्टालिन, महाराष्ट्र के उद्धव राज ठाकरे और शरद पंवार शिक्षा में हिंदी और भारतीय भाषाओं के महत्व का विरोध करके चुनावी लाभ पाने के लिए आक्रामक अभियान चला रहे हैं। नई शिक्षा नीति के तहत कई राज्य बच्चों को आठ वर्ष की आयु तक हिंदी और उनकी मातृभाषा में शिक्षा की व्यवस्था लागू कर दी है। मजेदार बात यह है की संस्कृत से तमिल, मराठी, हिंदी सहित भारतीय भाषाओं का अटूट रिश्ता रहा है। स्वतंत्रता सेनानी, संविधान निर्माता इन भाषाओं के प्रबल समर्थक रहे हैं। हिंदी दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में बोली जाती है। दिलचस्प बात यह है कि हिंदी दुनिया भर के 200 से ज्यादा विश्वविद्यालयों में पढ़ाई भी जाती है। पूरी दुनिया की अगर बात करें तो तकरीबन एक अरब लोग हिंदी समझते बोलते हैं और भारत में क्षेत्रीय राजनीतिक स्वार्थ के लिए कुछ नेता जनता को भ्रमित कर भड़काने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। स्वतंत्रता सेनानी, संविधान निर्माता इन भाषाओं के प्रबल समर्थक रहे हैं। हिंदी दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में बोली जाती है। दिलचस्प बात यह है कि हिंदी दुनिया भर के 200 से ज्यादा विश्वविद्यालयों में पढ़ाई भी जाती है। पूरी दुनिया की अगर बात करें तो तकरीबन एक अरब लोग हिंदी समझते बोलते हैं और भारत में क्षेत्रीय राजनीतिक स्वार्थ के लिए कुछ नेता जनता को भ्रमित कर भड़काने की हर रहे हैं। पूरी दुनिया की अगर बात करें तो तकरीबन एक अरब लोग हुल गाँधी की कांग्रेस और उसके साथी तमिलनाडु के स्टालिन, महाराष्ट्र के उद्धव राज ठाकरे और शरद पंवार शिक्षा में हिंदी और भारतीय भाषाओं के महत्व का विरोध करके चुनावी लाभ पाने के लिए आक्रामक अभियान चला रहे हैं। नई शिक्षा नीति के तहत कई राज्य बच्चों को आठ वर्ष की आयु तक हिंदी और उनकी मातृभाषा में शिक्षा की व्यवस्था लागू कर दी है। मजेदार बात यह है की संस्कृत से तमिल, मराठी, हिंदी सहित भारतीय भाषाओं का अटूट रिश्ता रहा है। स्वतंत्रता सेनानी, संविधान निर्माता इन भाषाओं के प्रबल समर्थक रहे हैं। हिंदी दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में बोली जाती है। दिलचस्प बात यह है कि हिंदी दुनिया भर के 200 से ज्यादा विश्वविद्यालयों में पढ़ाई भी जाती है। पूरी दुनिया की अगर बात करें तो तकरीबन एक अरब लोग हिंदी समझते बोलते हैं और भारत में क्षेत्रीय राजनीतिक स्वार्थ के लिए कुछ नेता जनता को भ्रमित कर भड़काने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। स्वतंत्रता सेनानी, संविधान निर्माता इन भाषाओं के प्रबल समर्थक रहे हैं। हिंदी दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में बोली जाती है। दिलचस्प बात यह है कि हिंदी दुनिया भर के 200 से ज्यादा विश्वविद्यालयों में पढ़ाई भी जाती है। पूरी दुनिया की अगर बात करें तो तकरीबन एक अरब लोग हिंदी समझते बोलते हैं और भारत में क्षेत्रीय राजनीतिक स्वार्थ के लिए कुछ नेता जनता को भ्रमित कर भड़काने की हर रहे हैं। पूरी दुनिया की अगर बात करें तो तकरीबन एक अरब लोग
राहत पहुंचाने में नाकाम राहत पहुंचाने में नाकाम
सरकार के खिलाफ लोगों के गुस्से को देखते हुए राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने कहा- भूकंप के बाद सरकार की शुरूआती प्रति-क्रियाओं में कमियां थी। दरअसल, भूकंप के बाद कई इलाकों में लोगों तक बचावकर्मी या राहत समग्री नहीं पहुंची थी। हालांकि, राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा कि सभी लोगों की मदद के लिए सरकार हरसंभव कोशिश कर रही है और देश में कोई भी बेघर नहीं रहेगा। इधर, मदद के लिए हलुड और वठ समेत दुनियाभर के 70 से भी ज्यादा देश आगे आए हैं। लोकल मीडिया के मुताबिक, सीरिया में 3 लाख लोगों को मजबूरन अपना घर छोड़ना पड़ा है।
राहत पहुंचाने में नाकाम राहत पहुंचाने में नाकाम
तुर्किये में सरकार ने एक बार फिर से ट्विटर सर्विस बहाल कर दी है। सरकार ने ट्विटर के अधिकारियों के साथ मीटिंग दिलाए। दरअसल बुधवार को तुर्किये में ट्विटर को ब्लॉक कर दिया गया था। सरकार के खिलाफ लोगों के गुस्से को देखते हुए राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने कहा- भूकंप के बाद सरकार की शुरूआती प्रतिक्रियाओं में कमियां थीं। दरअसल, भूकंप के बाद कई इलाकों में लोगों तक बचावक मर्मी या राहत समग्री नहीं पहुंची थी। हालांकि, राष्ट्रपति हरसंभव कोशिश कर रही है और देश में कोई भी बेघर नहीं रहेगा। इधर, मदद के लिए हल्लड और वठ समेत दुनियाभर के 70 से भी ज्यादा देश आगे आए हैं।
राहत पहुंचाने में नाकाम राहत पहुंचाने में नाकाम
तुर्किये में सरकार ने एक बार फिर से ट्विटर सर्विस बहाल कर दी है। सरकार ने ट्विटर के अधिकारियों के साथ मीटिंग दिलाए। दरअसल बुधवार को तुर्किये में ट्विटर को ब्लॉक कर दिया गया था। सरकार के खिलाफ लोगों के गुस्से को देखते हुए राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने कहा- भूकंप के बाद सरकार की शुरूआती प्रतिक्रियाओं में कमियां थीं। दरअसल, भूकंप के बाद कई इलाकों में लोगों तक बचावक मर्मी या राहत समग्री नहीं पहुंची थी। हालांकि, राष्ट्रपति हरसंभव कोशिश कर रही है और देश में कोई भी बेघर नहीं रहेगा। इधर, मदद के लिए हल्लड और वठ समेत दुनियाभर के 70 से भी ज्यादा देश आगे आए हैं। वठ समेत दुनियाभर के 70 से भी ज्यादा देश आगे आए हैं। वठ समेत दुनियाभर के 70 से भी ज्यादा देश आगे आए हैं।