भारतीय राजनीति के बेलगाम भोंपू हमारे...
रा जनीति में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिस तरह की भड़काऊ बयानबाजी की जा रही है, उससे लगता है कि राजनीति में शालीनता की सभी सीमाएं लांघी जा रही हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान सभी मर्यादाएं टूट जाएंगी। राजनीतिज्ञ वोट की राजनीति के चलते किसी भी हृदय विदारक घटनाओं का लाभ लेने से पीछे नहीं हटते। बेमतलब के हवा हवाई बयानों से कभी-कभी देश के लाखों लोगों जनीति में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिस तरह की भड़काऊ बयानबाजी की जा रही है, उससे लगता है कि राजनीति में शालीनता की सभी सीमाएं लांघी जा रही हैं। लोकसभा चुनाव के
दिग्गज नेता भी करते हैं। पिछले कुछ वर्षों से कुछ नेता तो अपने भड़काऊ और अभद्र भाषणों से चर्चित हुए हैं। राजनीति में जो नई पौध कुछ महीनों से उगी है, उसने तो हदें ही पार कर दी हैं। यह नई पौध चरित्रहनन की खतरनाक राजनीति पर उतर आई है। यह नहीं जानते कि भड़काऊ और अभद्र भाषण न केवल लोकतंत्र का ताना-बाना तोड़ते हैं और संविधान की प्रस्तावनाओं के भी खिलाफ हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे पर भड़काऊ भाषण देने के कई मामले हैं, आंध्र के आल इंडिया दिग्गज नेता भी करते हैं। पिछले कुछ वर्षों से कुछ नेता तो अपने भड़काऊ और अभद्र भाषणों से चर्चित हुए हैं। राजनीति में जो नई पौध कुछ महीनों से उगी है, उसने तो हदें ही पार कर दी हैं। यह नई पौध चरित्रहनन की खतरनाक राजनीति पर उतर आई है। यह नहीं जानते कि भड़काऊ और
अकबरुद्दीन ओवैसी अकबरुद्दीन ओवैसी भी इसी काम के लिए चर्चित हैं। भाजपा नेता वरुण गांधी पर भी भड़काऊ भाषण देने पर केस चला था, लेकिन अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था। जामा मस्जिद के इमाम पर भी कई बार भड़ाऊ भाषण देने के आरोप लगते रहे हैं। कांग्रेस के दिग्गिज और बयानवीर दिग्विजय सिंह तो विशुद्ध बयानबाजी की राजनीति ही करते हैं। उन्होंने मुस्लिमों को भयभीत करने और विकल्प के दौर पर कांग्रेस की ओर से आकर्षित करने के लिए अनेक सियासी चालें चलीं और हिंदू आतंकवाद का हौवा खड़ा किया। प्रयोग की जाने वाली शब्दावली में फर्क को मिटा दिया है। बेलगाम भोंपू दिग्विजय को उनके। की ओर से आकर्षित करने के लिए अनेक सियासी चालें चलीं और हिंदू आतंकवाद का हौवा खड़ा किया। प्रयोग की जाने वाली शब्दावली में फर्क को मिटा दिया है। बेलगाम भोंपू दिग्विजय को उनके। प्रयोग की जाने वाली शब्दावली में फर्क को मिटा दिया है। बेलगाम भोंपू दिग्विजय को उनके। मिटा दिया है। बेलगाम भोंपू दिग्विजय को उनके। प्रयोग की जाने वाली शब्दावली में फर्क को मिटा दिया है। की जाने वाली शब्दावली में फर्क को मिटा दिया है।
ईमानदार।' इस देश की राजनीति में गठबंधनों का बनना और टूटना आम ईमानदार।' इस देश की राजनीति में गठबंधनों का बनना और टूटना आम ईमानदार।' इस देश की राजनीति में गठबंधनों का बनना और टूटना आम ईमानदार।' इस देश की राजनीति में गठबंधनों का बनना और टूटना आम ईमानदार।' इस देश की राजनीति में गठबंधनों का बनना और टूटना आम ईमानदार।' इस देश की राजनीति में गठबंधनों का बनना और ईमानदार। इस देश की राजनीति में गठबंधनों का बनना और ईमानदार।
जाते हैं। पीठ में छुरा घोंपने जैसे शब्दों का इस्तेमाल तो आम बात हो गई है, लेकिन जैसे ही बिछड़े साथी फिर किसी नए मोड़ पर मिल जाते हैं तो लगता ही नहीं कि उनमें कभी कोई अलगाव था। इस भाषा ने ही तो प्रयोग दिया है। देश में कभी जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री थे और विरोध में डॉ. राम मनोहर लोहिया, श्याम प्रसाद मुखर्जी, एस.ए. हांगे, ए.के. गोपालन जैसे लोग तब आलोचना की भाषा, उन दिनों की संसद की कार्रवाई और बहसों को अब कोई नहीं पढ़ता। रजी देसाई प्रधानमंत्री थे और विरोध में डॉ. राम मनोहर लोहिया, श्याम प्रसाद मुखर्जी, एस.ए. हांगे, ए.के. गोपाल समय कार्रवाई और बहसों को अब कोई नहीं पढ़ता। रजी देसाई प्रधानमंत्री थे और विरोध में डॉ. राम मनोहर लोहिया, श्याम प्रसाद मुखर्जी, एस.ए. हांगे, ए.के. गोपाल समय और विरोध में डॉ. राम मनोहर लोहिया, श्याम प्रसाद मुखर्जी, एस.ए. हांगे, ए.के. गोपाल समय प्रसाद मुखर्जी, एस.ए. हांगे, ए.के. गोपाल समय मनोहर लोहिया, श्याम प्रसाद मुखर्जी, एस.ए. हांगे, ए.के. गोपाल समय प्रसाद मुखर्जी, एस.ए. हांगे, ए.के. गोपाल समय प्रसाद मुखर्जी, एस.ए. हांगे, ए.के. गोपाल समय
"सवाल को आधार बनाकर रीडर्स यदि आपको नोटों से भरा पर्स सड़क पर मिले तो आप उसे लौटाएंगे? इसी सवाल को आधार बनाकर रीडर्स डाइजेस्ट मैग्जीन ने दुनियाभर के शहरों में अलग-अलग स्थानों पर रुपए से भरे पर्स गिराए। फिर इंतजार किया कि कितने वापस आते हैं। इस आधार पर चुना गया स्थानों पर रुपए से भरे पर्स गिराए। यदि आपको नोटों से भरा पर्स सड़क पर मिले तो आप उसे लौटाएंगे? फिर इंतजार किया कि कितने लौटाएंगे? फिर इंतजार किया कि कितने वापस आते हैं। इस आधार इसी सवाल को आधार बनाकर रीडर्स डाइजेस्ट मैग्जीन ने दुनियाभर के शहरों में अलग-अलग स्थानों पर रुपए से भरे पर्स गिराए। फिर इंतजार किया कि कितने वापस आते हैं। इस आधार पर चुना गया स्थानों पर रुपए से भरे पर्स गिराए। यदि आपको नोटों से भरा पर्स सड़क पर मिले तो आप उसे लौटाएंगे? फिर इंतजार किया कि कितने लौटाएंगे? फिर इंतजार किया कि कितने वापस आते हैं। इस आधार आपको नोटों से भरा पर्स सड़क पर मिले तो आप उसे लौटाएंगे? फिर इंतजार किया कि कितने लौटाएंगे?"
वो जब याद आए बहुत याद आए, गमे जिंदगी...
पीठ में छुरा घोंपने जैसे शब्दों का इस्तेमाल तो आम बात हो गई है, लेकिन जैसे ही बिछड़े साथी फिर किसी नए मोड़ पर मिल जाते हैं तो लगता ही नहीं कि उनमें कभी कोई अलगाव था। इस भाषा ने ही तो राजनीति और बाजार में बोली जाने वाली या प्रयोग की जाने वाली शब्दावली में फर्क को मिटा दिया है। देश में कभी जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री थे और विरोध में डॉ. राम मनोहर लोहिया, श्याम प्रसाद मुखर्जी, एस.ए. हांगपीठ में छुरा घोंपने जैसे शब्दों का इस्तेमाल तो आम बात हो गई है, लेकिन जैसे ही में छुरा घोंपने जैसे शब्दों का इस्तेमाल तो आम बात हो गई है, लेकिन जैसे ही बिछड़े साथी फिर किसी नए मोड़ पर मिल जाते हैं तो लगता ही नहीं कि उनमें कभी कोई अलगाव था। इस भाषा ने ही तो राजनीति और बाजार में बोली जाने वाली या प्रयोग की जाने वाली शब्दावली में फर्क को मिटा दिया है। देश में कभी जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री थे और विरोध में डॉ. राम मनोहर लोहिया, श्याम प्रसाद मुखर्जी, एस.ए. हांगपीठ में छुरा घोंपने जैसे शब्दों का इस्तेमाल तो आम बात हो गई है, लेकिन जैसे ही लेकिन जैसे ही नेहरू, इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री थे और विरोध में डॉ. राम मनोहर लोहिया, श्याम प्रसाद मुखर्जी, एस.ए. हांगपीठ में छुरा घोंपने जैसे शब्दों का
बिछड़े साथी फिर किसी नए मोड़ पर मिल जाते हैं तो लगता ही नहीं कि उनमें कभी कोई अलगाव था। इस भाषा ने ही तो राजनीति और बाजार में बोली जाने वाली या प्रयोग की जाने वाली शब्दावली में फर्क को मिटा दिया है। देश में कभी जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री थे और विरोध में डॉ. राम मनोहर लोहिया, श्याम प्रसाद मुखर्जी, एस.ए. हांग पीठ में छुरा घोंपने जैसे शब्दों का इस्तेमाल तो आम बात हो गई है, लेकिन जैसे ही बिछड़े साथी फिर किसी नए मोड़ पर मिल जाते हैं तो लगता ही नहीं कि उनमें कभी कोई अलगाव था। इस भाषा ने ही तो राजनीति और बाजार में बोली जाने वाली या प्रयोग की जाने वाली शब्दावली में फर्क को मिटा दिया है। देश में कभी जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री थे और विरोध में डॉ. राम मनोहर लोहिया, श्याम प्रसाद बिछड़े साथी फिर किसी नए मोड़ पर मिल जाते हैं तो लगता ही नहीं कि उनमें कभी कोई अलगाव था। इस भाषा ने ही तो राजनीति और बाजार में बोली जाने वाली या प्रयोग की जाने वाली शब्दावली में फर्क को मिटा दिया है। देश में कभी जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री थे मोड़ पर मिल जाते हैं तो लगता ही नहीं कि उनमें कभी कोई अलगाव था। इस भाषा ने ही तो राजनीति और बाजार में बोली जाने वाली या प्रयोग की जाने वाली शब्दावली में फर्क को मिटा दिया है। देश में कभी जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री थे देश में कभी जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री थे देश में कभी जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री थे
अमिताभ बच्चन
रोज विज्ञान की दुनिया में खुलती नई विज्ञान की दुनिया में खुलती नई राहें..
जि स तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा रहा है, जिस तरह की भड़काऊ बयानबाजी की जा रही है, उससे लगता है कि राजनीति में शालीनता की सभी सीमाएं लांघी जा रही हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान सभी मर्यादाएं टूट जाएंगी। राजनीतिज्ञ वोट की राजनीति के चलते किसी भी हृदय विदारक घटनाओं का लाभ लेने से पीछे नहीं हटते। बेमतलब के हवा हवाई बयानों से कभी-कभी देश के लाखों लोगों की भावनाएं आहत होती हैं। ऐसा कोई छोटे-मोटे दल या फिर छुटभैये नेता ही नहीं बल्कि बड़े राजनीतिक दलों के तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा रहा है, जिस तरह की भड़काऊ बयानबाजी की जा रही है, उससे लगता है कि राजनीति में शालीनता की सभी सीमाएं लांघी जा रही हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान सभी मर्यादाएं टूट जाएंगी। राजनीतिज्ञ वोट की राजनीति के चलते किसी भी हृदय विदारक घटनाओं का लाभ लेने से पीछे नहीं हटते। बेमतलब के हवा
अभद्र भाषण न केवल लोकतंत्र का ताना-बाना तोड़ते हैं और संविधान की प्रस्तावनाओं के भी खिलाफ हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे पर भड़काऊ भाषण देने के कई मामले हैं, आंध्र के आल इंडिया मजलिस ए अभद्र भाषण न केवल लोकतंत्र का ताना-बाना तोड़ते हैं और संविधान की प्रस्तावनाओं के भी खिलाफ हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज
कई बार भड़ाऊ भाषण देने के आरोप लगते रहे हैं। कांग्रेस के दिग्गिज और बयानवीर दिग्विजय सिंह तो विशुद्ध बयानबाजी की राजनीति ही करते हैं। उन्होंने मुस्लिमों को भयभीत करने और विकल्प के दौर पर कांग्रेस की ओर से आकर्षित करने के लिए अनेक सियासी चालें चलीं और हिंदू आतंकवाद का हौवा खड़ा किया। प्रयोग की जाने वाली शब्दावली में फर्क को मिटा दिया है। बेलगाम भोंपू दिग्विजय को उनके बयानों पर हाईकमान ने कभी लताड़ नहीं लगाई। राजनीति में जिस संदर्भ में लोग, उन्होंने मुस्लिमों को भयभीत करने और विकल्प के दौर पर कांग्रेस की ओर से आकर्षित करने के लिए अनेक सियासी चालें चलीं और हिंदू आतंकवाद का हौवा खड़ा किया। प्रयोग की जाने वाली शब्दावली में फर्क को मिटा दिया है। बेलगाम भोंपू दिग्विजय को उनके बयानों पर हाईकमान ने कभी लताड़ नहीं लगाई। राजनीति में जिस संदर्भ में लोग, में फर्क को मिटा दिया है। बेलगाम भोंपू दिग्विजय को उनके बयानों
इस्तेमाल किय हदें पार कर ज प्रयोग की को मिटा दिया है। बेलगाम भोंपू दिग्विजय को उनके बयानों पर हाईकमान ने कभी लताड़ नहीं लगाई। राजनीति में जिस संदर्भमें लोग आ गए हैं, उनकी भाषा भी उसी संदर्भ की है। दुर्भाग्य से कुछ ऐसे लोग भी आ गए हैं, जिन्हें न राजनीति का अर्थ है। कौन-सी भाषा बोलेंगे? उनकी नजर में तो गठबंधनों शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, जो शालीनता की प्रयोग की जाने वाली शब्दावली में फर्क को मिटा दिया है। बेलगाम भोंपू दिग्विजय को उनके बयानों इस्तेमाल किय हदें पार कर ज प्रयोग की को मिटा दिया है। बेलगाम भोंपू दिग्विजय को उनके बयानों पर हाईकमान ने कभी लताड़ नहीं लगाई। राजनीति में जिस संदर्भमें लोग आ गए हैं, उनकी भाषा भी उसी संदर्भ की है। इस्तेमाल किय हदें पार कर ज प्रयोग की को मिटा दिया है। बेलगाम भोंपू दिग्विजय को उनके बयानों पर हाईकमान ने कभी लताड़ नहीं लगाई। राजनीति में जिस संदर्भमें लोग आ गए हैं।
वीजा बढ़ाने वीजा बढ़ाने का निर्णय केंद्र सरकार का निर्णय केंद्र सरकार करती है
पाक सिंधियों को नागरिकता : केंद्र को जवाब का अंतिम को जवाब का अवसरआदित्य भारत न्यूज 🔴 चंड़ीगढ़
देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी द्वारा विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा के पेपर के बीच में दिए गए गेप को बढ़ाना चाहिए। डिप्टी रजिस्ट्रार प्रज्जवल खरे के पास पहुंचे इन विद्यार्थियों को अभी वापस लौटा दिया है। 23 फरवरी से आयोजित एमबीबीएस फाइनल प्रोफ की परीक्षा के लिए अंडरटेकिंग जारी करने के बाद अब विद्यार्थी नई मांग लेकर पहुंच गए। देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी द्वारा विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा के पेपर के बीच में दिए गए गेप को बढ़ाना चाहिए। डिप्टी रजिस्ट्रार प्रज्जवल खरे के पास पहुंचे इन विद्यार्थियों को अभी वापस लौटा दिया है। 23 फरवरी से आयोजित एमबीबीएस फाइनल प्रोफ की परीक्षा के लिए अंडरटेकिंग जारी करने के बाद अब विद्यार्थी नई मांग लेकर पहुंच देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी द्वारा विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा के पेपर के बीच में दिए गए गेप को बढ़ाना चाहिए। डिप्टी रजिस्ट्रार प्रज्जवल खरे के पास पहुंचे इन विद्यार्थियों को अभी वापस लौटा दिया है। 23 फरवरी से आयोजित एमबीबीएस फाइनल प्रोफ की परीक्षा के लिए अंडरटेकिंग जारी करने के बाद अब विद्यार्थी नई मांग लेकर पहुंच गए। देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी द्वारा विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा के पेपर के बीच में दिए गए गेप को बढ़ाना चाहिए। डिप्टी रजिस्ट्रार प्रज्जवल खरे के पास पहुंचे इन विद्यार्थियों को अभी वापस लौटा दिया है। 23 फरवरी से आयोजित एमबीबीएस फाइनल प्रोफ की परीक्षा के लिए अंडरटेकिंग जारी करने के बाद अब विद्यार्थी नई मांग लेकर पहुंच परीक्षा के लिए अंडरटेकिंग जारी करने के बाद अब विद्यार्थी नई अंडरटेकिंग जारी करने के बाद अब विद्यार्थी नई
में रजिस्ट्रेशन भोपाल में रजिस्ट्रेशन के लिए जमा करना हैं। वास्तव में यूनिवर्सिटी को नियमानुसार फाइनल ईयर के विद्यार्थियों का रिजल्ट किसी भी हालत में मार्च के पहले निकालना होता है। अगर चलेंगी और फिर कैसे रिजल्ट निकलेगा। वास्तव में यूनिवर्सिटी को नियमानुसार फाइनल ईयर के विद्यार्थियों का रिजल्ट किसी भी हालत में मार्च के पहले निकालना होता है। अगर गैप बढ़ाई गई तो परीक्षाएं ही मार्च के मध्य तक चलेंगी और फिर कैसे रिजल्ट निकलेगा। ईयर के विद्यार्थियों का रिजल्ट किसी भी हालत में मार्च के पहले निकालना होता है। सिंधियों की याचिका राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले को अनदेखा कर इस तरह के अधिकार देना उचित नहीं है। किसी अन्य देश
सिंधियों की याचिका
लेकिन यह किए में रजिस्ट्रेशन भोपाल में रजिस्ट्रेशन के लिए जमा करना हैं। वास्तव में यूनिवर्सिटी को नियमानुसार फाइनल ईयर के विद्यार्थियों का रिजल्ट किसी भी हालत में मार्च के पहले निकालना होता है। अगर चलेंगी और फिर कैसे रिजल्ट निकलेगा। वास्तव में यूनिवर्सिटी को नियमानुसार फाइनल ईयर के विद्यार्थियों का रिजल्ट किसी भी हालत में मार्च के पहले निकालना होता है। अगर गैप बढ़ाई गई तो परीक्षाएं ही मार्च के मध्य तक चलेंगी और फिर कैसे रिजल्ट निकलेगा। ईयर के विद्यार्थियों का रिजल्ट किसी भी हालत में मार्च के पहले निकालना होता है। सिंधियों की याचिका राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले को अनदेखा कर ईयर के विद्यार्थियों का रिजल्ट किसी भी हालत में मार्च के पहले निकालना होता है। सिंधियों की याचिका राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले को अनदेखा कर ईयर के विद्यार्थियों का रिजल्ट किसी भी हालत में मार्च के पहले निकालना होता है। सिंधियों की याचिका राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले
एमआर-4
लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन के पुल के पास बचे एमआर-4 हिस्से की सड़क बनकर तैयार। लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन के पुल के पास बचे एमआर-4 हिस्से की सड़क बनकर तैयार हिस्से की सड़क बनकर तैयार।
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मंदिर की दुर्दशा देख टीआई दुर्दशा देख टीआई टीआई दुर्दशा देख टीआई
इंदौर | लसूड़िया थाना पहुंचते ही गुरुवार को टीआई ने थाने में रात्रि चेकिंग में गायब रहने वालों को भी नौकरी ढंग लसूड़िया थाना पहुंचते ही गुरुवार को टीआई ने थाने में रात्रि चेकिंग में गायब रहने वालों को भी नौकरी ढंग को भी नौकरी ढंग लसूड़िया थाना पहुंचते ही गुरुवार को टीआई ने थाने में रात्रि चेकिंग लसूड़िया थाना पहुंचते ही गुरुवार को टीआई ने थाने में रात्रि चेकिंग में गायब रहने वालों को भी नौकरी ढंग लसूड़िया थाना पहुंचते ही गुरुवार को टीआई ने थाने में रात्रि चेकिंग में गायब रहने वालों को भी नौकरी ढंग को भी नौकरी ढंग लसूड़िया थाना पहुंचते ही गुरुवार को टीआई ने थाने में रात्रि चेकिंगलसूड़िया थाना पहुंचते ही गुरुवार को टीआई ने थाने में रात्रि चेकिंग में गायब रहने वालों को भी नौकरी ढंग लसूड़िया थाना पहुंचते ही गुरुवार को टीआई ने थाने में रात्रि चेकिंग में गायब रहने वालों को भी नौकरी ढंग को भी नौकरी ढंग लसूड़िया थाना पहुंचते ही गुरुवार को टीआई ने थाने में रात्रि चेकिंगलसूड़िया थाना पहुंचते ही गुरुवार को टीआई ने थाने में रात्रि चेकिंग में गायब रहने वालों को भी नौकरी ढंग लसूड़िया थाना पहुंचते ही गुरुवार को टीआई ने थाने में रात्रि चेकिंग में गायब रहने वालों को भी नौकरी ढंग को भी नौकरी ढंग लसूड़िया थाना
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मंदिर की दुर्दशा देख टीआई ने जवानों को देख टीआई ने दुर्दशा देख जवानों....
इंदौर। लसूड़िया थाना पहुंचते ही गुरुवार को टीआई ने थाने में बने मंदिर की दुर्दशा देख जवानों को फटकार लगाई। साथ ही रात्रि चेकिंग में गायब रहने वालों को भी हड़काया। पलासिया से लसूड़िया थाने पहुंचते ही टीआई राजेंद्र सोनी ने थाने की दुर्दशा नौकरी ठंग से करो वरना... देखी तो स्टाफ पर भड़क गए। उन्होंने व अन्य लसूड़िया थाना पहुंचते ही गुरुवार को टीआई ने थाने में बने मंदिर की दुर्दशा देख जवानों को फटकार लगाई। साथ ही रात्रि चेकिंग में गायब रहने वालों को भी हड़काया। पलासिया से लसूड़िया थाने पहुंचते ही टीआई राजेंद्र सोनी ने थाने की दुर्दशा नौकरी ठंग से करो वरना... देखी तो स्टाफ पर भड़क गए। उन्होंने व अन्य लसूड़िया थाना पहुंचते ही गुरुवार को टीआई ने थाने में बने मंदिर की दुर्दशा देख जवानों को फटकार लगाई। साथ ही रात्रि चेकिंग में गायब रहने वालों को भी हड़काया। पलासिया से लसूड़िया थाने पहुंचते ही टीआई राजेंद्र सोनी ने थाने की दुर्दशा नौकरी ठंग से करो वरना... देखी तो स्टाफ पर भड़क गए। उन्होंने व अन्य
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मंदिर की दुर्दशा देख टीआई ने जवानों को देख टीआई ने दुर्दशा देख जवानों ....
इंदौर। लसूड़िया थाना पहुंचते ही गुरुवार को टीआई ने थाने में बने मंदिर की दुर्दशा देख जवानों को फटकार लगाई। साथ ही रात्रि चेकिंग में गायब रहने वालों को भी हड़काया। पलासिया से लसूड़िया थाने पहुंचते ही टीआई राजेंद्र सोनी ने थाने की दुर्दशा नौकरी ठंग से करो देखी तो स्टाफ पर भड़क गए। लसूड़िया थाना पहुंचते ही गुरुवार को टीआई ने थाने में बने मंदिर की दुर्दशा देख जवानों को फटकार लगाई। साथ ही रात्रि चेकिंग में गायब रहने वालों को भी हड़काया। पलासिया से लसूड़िया थाने पहुंचते ही टीआई राजेंद्र सोनी ने थाने की दुर्दशा नौकरी ठंग से करो देखी तो स्टाफ पर भड़क गए।
राज-काज
शहर मेंमुझे बहुत दिया बहुत दिया... अब मेरी बारी है देने की बारी...
संयोगितागंज थाना क्षेत्र में एमजीएम मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को डॉक्टर मुकेश कुमार काम कर रहे थे। अचानक किसी काम से वह हेड ऑफ डिपार्टमेंट के कैबिन में चले गए। इस दौरान बदमाश उनका लैपटॉप चुराकर ले गया।
संयोगितागंज थाना क्षेत्र में एमवीएम मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को डॉक्टर मुकेश कुमार काम कर रहे थे। अचानक किसी काम से वह हेड ऑफि डिपार्टमेंट के कैबिन में चले गए। इस दौरान बदमाश उनका लैपटॉप चुराकर से गया संयोगितागंज थाना क्षेत्र में एमजीएम मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को डॉक्टर मुकेश कुमार काम कर रहे थे। अचानक किसी काम से वह हेड ऑफ डिपार्टमेंट के कैबिन में चले गए। इस दौरान बदमाश उनका लैपटॉप चुराकर ले गया। संयोगितागंज थाना क्षेत्र में एमवीएम मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को डॉक्टर मुकेश कुमार काम कर रहे थे। अचानक किसी काम से वह हेड ऑफि डिपार्टमेंट के कैबिन में चले गए। इस दौरान बदमाश उनका लैपटॉप चुराकर से गया। संयोगितागंज थाना क्षेत्र में एमजीएम मेडिकल कॉलेज में गुकल कॉलेज में गुरुवार चले गए। इस दौरान बदमाश उनका लैपटॉप चुराकर ले गया संयोगितागंज মানা क्षेत्र में एमजीएम मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को डक्टिर मुकेश कुमार काय कर रहे थे। अचानक किसी काम से वह हेड ऑफ डिपार्टमेंट के केबिन में चले गए। इस दौरान काम से वह हेड ऑफ डिपार्टमेंट के केबिन में चले गए। इस दौरान काम से वह हेड ऑफ डिपार्टमेंट के केबिन में चले गए। काम से वह हेड ऑफ डिपार्टमेंट के केबिन में चले गए। इस दौरान संयोगितागंज थाना क्षेत्र में एमजीएम मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को डॉक्टर मुकेश कुमार काम कर रहे थे। अचानक किसी काम से वह हेड ऑफ डिपार्टमेंट के कैबिन में चले गए। इस दौरान बदमाश उनका लैपटाप चुराकर ले गया संयोगितागंज थाना क्षेत्र में एमजीएम मेडिकल कॉलेज में गुरुवार चले गए।
वीजा बढ़ाने का निर्णय केंद्र निर्णय सरकार करती वीजा बढ़ाने का....
वीजा बढ़ाने का निर्णय केंद्र निर्णय सरकार करती वीजा बढ़ाने का....
आदित्य भारत न्यूज 🔴 चंड़ीगढ़
देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी द्वारा विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा के पेपर के बीच में दिए गए गेष को बढ़ाना चाहिए। डिप्टी रजिस्ट्रार प्रक्षकत खरे के पारा पहुंचे इन विद्यार्थियों को अभी वापस लौटा दिया है। 23 फरवरी से काम की आयोजित एमबीबीएस फाइनल प्रोफ को परोधा के लिए अंडरटेकिंग जारी करने के बाद अब विद्यार्थी नई मांग लेकर पहुंच गए। देखी अहिल्या देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी द्वारा विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा के पेपर के बीच में दिए गए गेष को बढ़ाना चाहिए। डिप्टी रजिस्ट्रार प्रक्षकत खरे के पारा पहुंचे इन विद्यार्थियों को अभी वापस लौटा दिया है। 23 फरवरी से काम की
रिजल्ट आ पाएगा। वैसे इन विद्यार्थियों की संख्या गिनती मात्र की है, जी ऐसी मांग उठा रहे हैं। इनके कारण वो सभी विद्यार्थी परेशान होगे, जिन्हें 31 मार्च के पहले अपनी मार्कशीट भोपाल में रजिस्ट्रेशन भोपाल में रजिस्ट्रेशन के लिए जमा करना हैं। वास्तव में यूनिवर्सिटी को नार फाइनल ईयर के विद्यार्थियों का रिजल्ट किसी भी हालत में मार्च के पहले निकालरा होता है। वास्तव में यूनिवर्सिटी को निकानुसार फाइनल ईयर सम्झना होगा के विद्यार्थियों का रिजल्ट किसी भी हालत में मार्च के पहले निकालना होता है। वास्तव में यूनिवर्सिटी को नियमानुसार कनाल ईगल के विद्यार्थियों का रिजल्ट किसी भी हालत में मार्च के पहले निकालना होता है। वास्तव में यूनिवर्सिटी को नियमानुसार फाइनल ईयर के विद्यार्थियों का रिजल्ट किसी भी होता विद्यार्थियों रिजल्ट आ पाएगा। वैसे इन विद्यार्थियों की संख्या गिनती मात्र की है, जी ऐसी मांग उठा रहे हैं। इनके कारण वो सभी विद्यार्थी परेशान होगे, जिन्हें 31 मार्च के पहले अपनी मार्कशीट भोपाल में रजिस्ट्रेशन भोपाल में रजिस्ट्रेशन के लिए जमा करना हैं। वास्तव में यूनिवर्सिटी को नार फाइनल ईयर के विद्यार्थियों का रिजल्ट किसी भी हालत में मार्च के पहले निकालरा होता है। वास्तव में यूनिवर्सिटी को निकानुसार फाइनल ईयर सम्झना होगा के विद्यार्थियों का रिजल्ट किसी भी हालत में मार्च के पहले निकालना होता है। वास्तव में यूनिवर्सिटी को नियमानुसार कनाल ईगल के विद्यार्थियों