मुख्य अभियुक्त विकास यादव पिता डीपी यादव को चुनाव
दागियों की इस ताजा फेहरिश्त में हरियाणा में कांग्रेस विधायक और जोसिका लाल हत्याकांड में सजायाफ्ता मनु शर्मा के पिता विनोद शर्मा एनडीए में और कर्नाटक के बहुचर्चित खनन घोटाले में नामजद में में इन विलयों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने रही है।
राजकुमार तिवारी, ब्यावरा (मप्र) लेखक दिल्ली के संपादक है।
चु नावी हवा का रुख भांपकर दलबदल और दागी भाजपा में शामिल होने की होड़ में लगे हैं। सत्तामोह के लालच में भाजपा ने भी नैतिक और शुचिता के संघीय पाठ को भुलाकर दागियों को गोद लेने का सिलसिला तेज कर दिया है। दागियों की इस ताजा फेहरिश्त में हरियाणा में कांग्रेस विधायक और जोसिका लाल हत्याकांड में सजायाफ्ता मनु शर्मा के पिता विनोद शर्मा एनडीए में और कर्नाटक के बहुचर्चित खनन घोटाले में नामजद आरोपी श्रीरामुलु भाजपा में दाखिल हुए हैं। भाजपा में इन विलयों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। सुषमा स्वराज ने सोशल मीडिया पर तीखा विरोध जताकर पार्टी को झटका दिया है। यदि पार्टी ने सुषमा के ऐतराज को चेतावनी के रूप में नहीं लिया तो उसके लिए दागियों को गोद में बिठाने की ये कोशिशें आत्मघाती भी सिद्ध हो सकती हैं चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में भाजपा नेतृत्व वाले राजग गठबंधन की बढ़त से लालायित होकर दूसरे दलों के दागी और दलबदलू गिरगिट की तरह रंग बदलने पर उतारू हो गए हैं। दागी और दलबदलू, निष्ठावानों से कहीं ज्यादा अवसरवादी और दूरदृष्टा होते हैं। इसलिए वे नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनते देख रहे हैं, तो सत्ता-सुख के इन भोगियों का पलायन उनके निजी हित साधन के लिए तो ठीक है, लेकिन यह समझ से परे है कि मोदी के नेतृत्व में माहौल राजग गठबंधन के पक्ष में है, तो वह क्यों दागियों को बेवजह महत्व दे रही है? यदि वाकई माहौल मोदी के पक्ष में जैसा दिखाई दे रहा है, तो तय है, तमाम दागी और क्षेत्रीय दल इस आंधी में तिनके की तरह अपना वजूद खो बैठेंगे? लेकिन माहौल यदि औद्योगिक घरानों और मीडिया प्रबंधन की बदौलत रचा गया है तो नतीजे ढांक के तीन पांत भी हो सकते हैं। इसलिए भाजपा को सुषमा स्वराज के सबक को सही वक्त पर दी चेतावनी के रूप में लेने की जरूरत है। भाजपा को ख्याल रखने की जरूरत है कि नवें दशक में जब वह विस्तार के देशव्यापी फलक पर स्थापित हो रही थी, तब उसका चाल, चरित्र और चेहरा कांग्रेस व अन्य राजनीतिक दलों से भिन्न था। इसी बूते भाजपा ने यदि वाकई माहौल मोदी के पक्ष में जैसा दिखाई दे रहा है, तो तय है, तमाम दागी और क्षेत्रीय दल इस आंधी में तिनके की तरह अपना वजूद खो बैठेंगे? लेकिन माहौल यदि औद्योगिक घरानों और मीडिया प्रबंधन की बदौलत रचा गया है तो नतीजे ढांक के तीन पांत भी हो सकते हैं। इसलिए भाजपा को सुषमा स्वराज के सबक को सही वक्त पर दी चेतावनी के रूप में लेने की जरूरत है। भाजपा को ख्याल रखने की जरूरत है कि नवें दशक में जब वह विस्तार के देशव्यापी फलक पर स्थापित हो रही थी, तब उसका चाल, चरित्र और चेहरा कांग्रेस व अन्य राजनीतिक दलों से भिन्न था। इसी बूते भाजपा ने इसलिए भाजपा को सुषमा स्वराज के सबक को सही वक्त पर दी चेतावनी के रूप में लेने की जरूरत है। भाजपा को ख्याल रखने की जरूरत है कि नवें दशक में जब वह विस्तार के देशव्यापी फलक पर स्थापित हो रही थी, तब उसका चाल, चरित्र और चेहरा कांग्रेस व अन्य राजनीतिक दलों से भिन्न था। इसी बूते भाजपा ने इसी बूते भाजपा ने इसी बूते भाजपा ने
कई राज्यों में सरकारें बनाई और केंद्र में भी अटलबिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार बनाने में कामयाब रही। इसके बाद भाजपा छद्म इंडिया शाइनिंग के प्रबंधों और दागियों व भ्रष्टाचारियों से बेमेल गठबंधनों के मोहपाश में उलझकर अपना क्षरण अपने ही हाथों करती रही। अब मोदी के नेतृत्व में यदि उसे केंद्र में सरकार बनाने की उम्मीद दिख रही है तो दागियों के पीछे भागकर इस उम्मीद को पलीता लगाने की जरूरते कतई नहीं है? जाहिर है, दागियों के मुद्दे पर भाजपा को आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत है, क्योंकि ऐसी गलतियां पहले भी करके पार्टी ने भूल सुधार की कोशिश नहीं की है। वेंकैया नायडू के अध्यक्ष रहते हुए बहुचर्चित नीतीश कटारा हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त विकास यादव के पिता डीपी यादव को चुनाव के ऐन वक्त पर पार्टी में शामिल कर लिया गया था। इस पहल की मीडिया, जनता व खुद पार्टी में इतनी जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई थी कि अगले ही दिन उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा। उत्तर प्रदेश से ही बहुजन समाज पार्टी की सरकार में खनन व सहकारिता मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाह को विधानसभा चुनाव के अवसर पर पार्टी में शामिल करने का यही हश्र भुगतना पड़ा था। श्रीरामुलु अवैध उत्खनन के लिए कर्नाटक के जर्नादन रेड्डी बंधुओं के करीबी रहे हैं। जब रेड्डी बंधुओं पर अवैध उत्खनन के मामले में सीबीआई ने कार्रवाई की तो उनके साथ-साथ श्रीरामुलु ने भी भाजपा छोड़ दी थी। श्रीरामुलु ने अवैध खनन से कमाए धन के बूते 2012 में बीएसआर कांग्रेस नाम से एक नया राजनीतिक दल खड़ा कर दिया। बीते साल कर्नाटक विधानसभा चुनाव में इस दल को तीन फीसदी वोटों के साथ चार सीटों पर जीत भी मिली। इन चुनाव नतीजों के बाद जब भाजपा ने अपनी हार का आकलन किया तो इस नतीजे पर पहुंची कि यदि श्रीरामुलु और बीएस येदियुरप्पा की पार्टी के बीच मत विभाजन न हुआ होता तो कर्नाटक में भाजपा को मुंहकी नहीं खानी पड़ती। इस आत्मनिरीक्षण ने और लोकसभा में विजय की चिंता ने येदियुरप्पा के लिए पार्टी में प्रवेश के द्वार खोले और अब श्रीरामुलु के लिए भी खोल दिए। संभव है, कुछ दिनों में रेड्डी बंधु भी भाजपा की देहरी पर खड़े दिखाई दें? तय है नैतिकता के सभी तकाजों को ताक पर रखकर भाजपा देश की प्राकृतिक संपदा के लुटेरों को गले लगाने में लगी है। श्रीरामुलु भी कर्नाटक के एक दलित नेता हैं। जाहिर है, जातिविहीन व निष्कलंक राजनीति का मुद्दा भाजपा की मुट्ठी से रेत की माफिक फिसलता जा रहा है। लिहाजा, भाजपा को सुषमा के विरोध को एक नैतिक शुचिता के पाठ इस आत्मनिरीक्षण ने और लोकसभा में विजय की चिंता ने येदियुरप्पा के लिए पार्टी में प्रवेश के द्वार खोले और अब श्रीरामुलु के लिए भी खोल दिए। संभव है, कुछ दिनों में रेड्डी बंधु भी भाजपा की देहरी पर खड़े दिखाई दें? तय है नैतिकता के सभी तकाजों को ताक पर रखकर भाजपा देश की प्राकृतिक संपदा के लुटेरों को गले लगाने में लगी है। श्रीरामुलु भी कर्नाटक के एक दलित नेता हैं। जाहिर है, जातिविहीन व निष्कलंक राजनीति का मुद्दा भाजपा की मुट्ठी से रेत की माफिक फिसलता जा रहा है। लिहाजा, भाजपा को सुषमा के विरोध को एक नैतिक शुचिता के पाठ इस आत्मनिरीक्षण ने और लोकसभा में विजय की चिंता ने येदियुरप्पा के लिए पार्टी में प्रवेश के द्वार खोले और अब श्रीरामुलु के लिए भी खोल दिए। संभव है, कुछ दिनों में रेड्डी बंधु भी भाजपा की देहरी पर खड़े दिखाई दें? तय है नैतिकता के सभी तकाजों को ताक पर रखकर भाजपा देश की प्राकृतिक संपदा के लुटेरों को गले लगाने में लगी है। श्रीरामुलु भी कर्नाटक के एक दलित नेता हैं। जाहिर है, जातिविहीन व निष्कलंक राजनीति का मुद्दा भाजपा की मुट्ठी से रेत की माफिक फिसलता जा रहा है। लिहाजा, भाजपा को सुषमा के विरोध को एक नैतिक शुचिता के